सुल्तानपुर का इतिहास
जीला सुल्तानपुर=
सुलतानपुर के अन्तिम छोर पर बसा मौजा दक्खिन गांव क्यार अपने में एक गौरवशाली इतिहास को आज भी संजोये हुए जमीदारी मौजा प्रमुख दक्खिन गांव क्यार के अंतर्गत 24 जमीदारी गांव सम्मिलित थे । जिसमें 12 गांव नदी उस पार व 12 गांव गोमती नदी के इस पार के थे । 24 जमींदारी गांव के ठीक उक्त ' क्यार ' को दक्षिण होने के कारण इसका नाम ' दक्खिन गाव क्यार ' पड़ा । कहा जाता है कि नवाबों के समय *अयोध्या की ओर से ' भर ' जाति के ब्राह्मणों* ने ' क्यार ' पर जबर्दस्त आक्रमण किया । विशेष रूप से यहां के ठाकुरों ने जमकर उनसे मोर्चा लिया और उनके आक्रमण को विफल कर दिया , जिसमें प्रमुख रूप नायक बाबा ब्रह्मदेव , बाबा धनीवीर एवं बाबा परवाया । इनके सिर कलम कर दिये गये थे । ये नोग जहां - जहा पर मारे गये , वहीं - वहीं पर इन्होंने अपनी समाधि ले ली । ये समाधियां दक्खिन गांव स्थार जिला भीट करेहटा व केरहन का पुरवा में आज भी मौजूद हैं । मरने के बाद उपरोक्त बाबाओं म ठाकुरों से अपनी पूजा ले ही ली । आज भी मौजा एवं इससे लगने वाले पहले जमींदारी के 24गांव के लोग अब भी उपरोक्त तीनों बाबाओं को धनेतिया देने आते हैं । 24 उपरोक्त गांवों की लड़कियों के बड़े पुत्र के उत्पन्न होने की धनेतिया अनिवार्य रूप से देने यहां आते हैं । इस मौके पर गुड़ - धनिया व लगोट चढ़ाते हैं । और ब्राह्मण खिलाते हैं । कुछ दान - पुण्य भी करते हैं । धनेतियां देने के अवसर पर लड़की के बड़े पर का आना आवश्यक होता है । ब्रह्मदेव बाबा का ' क्यार ' में एक मंदिर भी है । जहा नियमित रूप से प्रतिवर्ष अगहन द्वादशी शुक्ल पक्ष को यहां एक विशाल मेला भी लगता है व रामलीला का भव्य स्तर पर आयोजन किया जाता है । जिल्लाभीट करेहटा जहां धनीबीर बाबा मारे हये थे , वहीं एक किले के अवशेष आज भी र है । एक कुम्हार ने विशेष ईंटें से
इसके निर्माण में सहयोग किया था , जो ध्वस्त स्थिति में बहुत बड़े मलबे के साथ प्राचीन इतिहास को बता रही है । यहा बताया जाता है कि काफी सम्पत्ति धन , दौलत इस कोट के अन्दर पड़ी है । आज भा लालचबस खुदाई करन वाल व्याक्त इसा कार्य में सफलता हासिल नहीं कर पाये । माया उन्हें विभिन्न रूप में बहुत परेशानी में डाल देती है । दक्खिनगांव के दक्खिन तरफ नहर के किनारे तक बहुत पुरानी बस्ती एवं बड़ी बाजार होने के अवशेष प्रमाण है । यहां के कुकुरदौड़ा का इतिहास भी आश्चर्य चकित एवं विस्मृत करने वाला है । कुत्ते काट लेने वाले व्यक्ति का यहां आ जाने मात्र से यह के चक्कर लगा लेने व वहां पड़ी किसी भी कंकरीट को उठाकर उसके बराबर गुड़ बांट देने व उसका फेरा कर लेने से प्रसाद ग्रहण करने के उपरांत मरीज हरहालत में ठीक हो जाता है । अधिसंख्य । मरीजों को वास्तव में लाभ पहुंचा है । इलाज के लिए दूर - दूर से लोग आते हैं । दक्खिन गांव क्यार ग्रामपंचायत में ब्राह्मण , ठाकुर , मुसलमान , पठान , रैदास , पासी , तेली . गूजर , धोबी , कसगरं , वैश्य , कहार , नट आदि सभी जातियों के व्यक्ति निवास करते हैं । कुशल कारीगर , प्रशिक्षित किसान व परिश्रमी मजदर आज भी अपना - अपना कार्य कर रहे हैं । ग्रामपंचायत के वासी आज विकास के युग में प्रशासन से सहयोग चाहते हुए इस ग्राम पंचायत के ऐतिहासिक स्थलों की मरम्मत कराकर पर्यटनस्थल बनाने की इच्छा रखते हैं । देखते हैं कि ग्रामवासियों का यह सपना कब पूरा होता है
सौजन्य :श्री दयाशंकर भारद्वाज
भारशिव अवधेश राजभर
भारशिव भर क्षत्रिय सेना।
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